हँस कर बोला करो, बुलाया करो,
आपका घर है, आया-जाया करो,
मुस्कराहट है हुस्न का जेवर,
रूप बढ़ता है, मुस्कुराया करो,
हद से बढ़कर हसीन लगते हो,
झुठी कसमे ज़रूर खाया करो,
हुक्म करना भी एक सखावत है,
हमको खिदमत कोई बताया करो,
बात करना भी बादशाहत है,
बात करना न भूल जाया करो,
ताकि दुनिया की दिलकशी न घटे,
नित नए पैरहन में आया करो,
कितने सादा मिजाज हो तुम सनम,
उस गली में बहुत न जाया करो...!!!
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