तेरा एहसास
आँख लगी ही थी की तेरी यादों की आहट ने जगा दिया,
हवा चली ही थी की तेरे पल्लू की खुसबू ने चमन महका दिया,
मेघ घिरे ही थे की तेरी जुल्फों के सावन ने मन नेहला दिया,
कही कोई आस-पास नज़र तो आता नहीं था,
फिर भी तेरे वजूद ने नाजाने कैसे दिल बहला दिया.
2 comments:
yaar tumne mujhe uska ehsaah fir dila diya....,kya kashish hai is kavita me..
its really nice..so u have ur blog now..keep it up...
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